केंद्रीय बजट 2026-27 में किसानों को मिले पांच बड़े तोहफे: उर्वरक सब्सिडी में 1.70 लाख करोड़ की बढ़ोतरी से इनपुट लागत घटेगी, कृषि बजट 1.32 लाख करोड़ पहुंचा, बहुभाषी एआई टूल ‘भारत विस्तार’ से व्यक्तिगत सलाह मिलेगी, उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे नारियल और काजू को समर्थन से आय बढ़ेगी, तथा मत्स्य पालन व पशुपालन के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी और एकीकृत विकास से ग्रामीण रोजगार मजबूत होगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया, जिसमें किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादकता सुधारने और विविधीकरण को प्रोत्साहन शामिल है। कृषि विभाग का बजट 1,32,561 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया, जो पिछले वर्ष से 7 प्रतिशत अधिक है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
उर्वरक सब्सिडी को 1,70,944 करोड़ रुपये आवंटित किया गया, जो किसानों की उत्पादन लागत को कम करने में मदद करेगा, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां उर्वरक कीमतें वैश्विक उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं। इस सब्सिडी से डीएपी और यूरिया जैसे उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे फसल उत्पादन में 10-15 प्रतिशत की संभावित वृद्धि हो सकती है।
बहुभाषी एआई टूल ‘भारत विस्तार’ का लॉन्च किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा, जो एग्रीस्टैक पोर्टल और आईसीएआर की कृषि प्रथाओं को एकीकृत करेगा। यह टूल क्षेत्रीय भाषाओं में काम करेगा, जैसे हिंदी, तमिल और मराठी, और किसानों को मौसम पूर्वानुमान, फसल चयन तथा जोखिम प्रबंधन पर व्यक्तिगत सलाह देगा, जिससे फसल नुकसान 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जिसमें नारियल, काजू, कोको, बादाम, अखरोट और पाइन नट जैसी फसलों का समर्थन शामिल है। तटीय राज्यों में नारियल प्रमोशन स्कीम से पुराने पेड़ों को नई किस्मों से बदलने की योजना है, जिससे उत्पादन 25 प्रतिशत बढ़ सकता है और निर्यात क्षमता मजबूत होगी। पूर्वोत्तर में अगर के पेड़ों और पहाड़ी क्षेत्रों में नट्स की खेती से किसानों की आय दोगुनी होने की उम्मीद है।
मत्स्य पालन विभाग को 2,761.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें पीएम मत्स्य संपदा योजना के लिए 2,500 करोड़ रुपये शामिल हैं। 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास किया जाएगा, जो तटीय क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगा और स्टार्टअप्स तथा महिला-नेतृत्व वाले समूहों को बाजार संपर्क प्रदान करेगा। इससे मछली उत्पादन में 15 प्रतिशत वृद्धि और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
पशुपालन क्षेत्र में क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जो पशुधन उद्यमों को आधुनिक बनाने और डेयरी तथा पोल्ट्री के एकीकृत मूल्य श्रृंखलाओं को बढ़ावा देगा। लिवेस्टॉक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित होंगे, विशेषकर छोटे किसानों के लिए जहां पशुपालन आय का 16 प्रतिशत योगदान देता है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 100 जिलों में कार्यान्वयन होगा, जो कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और सतत प्रथाओं पर केंद्रित है। इसमें पोस्ट-हार्वेस्ट स्टोरेज, सिंचाई सुविधाएं और अल्प तथा दीर्घकालिक ऋण की उपलब्धता शामिल है, जिससे 1.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचेगा।
ग्रामीण विकास के लिए ‘विकसित भारत ग्राम’ योजना में 1.51 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसमें राज्यों का योगदान शामिल है। एमजीएनआरईजीए के लिए केंद्र का हिस्सा 95,692 करोड़ रुपये बढ़ाया गया, जो कुल आवंटन को 1.51 लाख करोड़ से ऊपर ले जाएगा, इससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे और रोजगार में सुधार होगा।
कृषि क्षेत्र में कुल आवंटन 1,62,671 करोड़ रुपये पहुंचा, जो खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ग्रामीण आजीविका पर केंद्रित है। सैंडलवुड संरक्षण और निर्यात-उन्मुख ब्रांडिंग से किसानों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जबकि कैश्यू और कोको की प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने से आत्मनिर्भरता हासिल होगी।
प्रमुख आवंटन की तालिका
किसानों के लिए मुख्य बिंदु
| क्षेत्र | आवंटन (करोड़ रुपये में) | मुख्य लाभ |
|---|---|---|
| कृषि विभाग | 1,32,561 | उत्पादकता वृद्धि और अनुसंधान |
| उर्वरक सब्सिडी | 1,70,944 | इनपुट लागत में कमी |
| मत्स्य पालन | 2,761.80 | मूल्य श्रृंखला विकास |
| पीएम मत्स्य संपदा योजना | 2,500 | स्टार्टअप्स और महिला समूहों को समर्थन |
| उच्च मूल्य कृषि | 350 | फसल विविधीकरण |
| एमजीएनआरईजीए (केंद्र हिस्सा) | 95,692 | ग्रामीण रोजगार |
| ग्रामीण विकास (कुल) | 1,51,000+ | बुनियादी ढांचा सुधार |
उत्पादकता बढ़ाने के उपाय : एआई टूल से जोखिम प्रबंधन और बेहतर निर्णय लेने में मदद, जिससे छोटे किसानों की फसल हानि कम होगी।
विविधीकरण रणनीति : पारंपरिक फसलों से हटकर उच्च मूल्य वाली फसलों पर फोकस, जैसे तटीय क्षेत्रों में नारियल और काजू, जो निर्यात को बढ़ावा देगा।










