“चीन ने 2025 में रूस से 25.3 टन सोना आयात किया, जिसमें नवंबर में ही रिकॉर्ड $961 मिलियन का सौदा हुआ। वहीं, 2026 की शुरुआत में जनवरी में वैश्विक सेंट्रल बैंकों की नेट गोल्ड खरीद मात्र 5 टन रही, जो 2025 के मासिक औसत 27 टन से 82% कम है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव और रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन की वजह से गोल्ड की मांग बनी रहेगी, और दामों में भारी गिरावट की संभावना कम है।”
चीन-रूस गोल्ड ट्रेड में बड़ा उछाल, लेकिन सेंट्रल बैंक खरीद में आई तेज गिरावट
2025 में चीन ने रूस से सोने का आयात 9 गुना बढ़ाकर 25.3 टन कर दिया, जिसकी कीमत $3.29 बिलियन पहुंच गई। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले कई गुना ज्यादा है, जहां आयात मात्र $223 मिलियन का था। खास तौर पर नवंबर 2025 में चीन ने रूस से $961 मिलियन का सोना खरीदा, जो दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा एकल मासिक गोल्ड डील माना जा रहा है। अक्टूबर में भी $930 मिलियन का सौदा हुआ था।
यह बढ़ोतरी चीन की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है। अनुमान है कि आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा सोना चीन ने खरीदा हो सकता है, क्योंकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 2025 में चीन का वास्तविक गोल्ड अधिग्रहण 250 टन तक पहुंच सकता है।
दूसरी ओर, रूस ने घरेलू बाजार में अपने रिजर्व से सोना बेचना शुरू किया है। 2025 में रूस ने चीन को सोना निर्यात बढ़ाया, जो उसके बजट घाटे को पूरा करने की मजबूरी को दर्शाता है। रूस के नेशनल वेल्थ फंड में सोने की मात्रा मई 2022 के 554.9 टन से घटकर जनवरी 2026 में 160.2 टन रह गई। हालांकि, गोल्ड प्राइस में 2025 में 65% की तेजी से रूस को $216 बिलियन का फायदा हुआ है, जो उसके फ्रोजेन एसेट्स की भरपाई करता है।
वैश्विक स्तर पर सेंट्रल बैंकों की गोल्ड खरीद 2025 में 863.3 टन रही, जो 2024 से 21% कम है और तीन साल से चली आ रही 1,000 टन से ज्यादा की सीरीज टूट गई। यह आंकड़ा 2010-2021 के औसत 473 टन से अभी भी काफी ऊपर है, और इतिहास में चौथा सबसे बड़ा सालाना अधिग्रहण माना जा रहा है। चौथी तिमाही में खरीद 230 टन तक पहुंची, जो पिछली तिमाही से 6% ज्यादा थी।
लेकिन 2026 की शुरुआत में स्थिति बदल गई। जनवरी में नेट खरीद मात्र 5 टन रही, जो 2025 के मासिक औसत 27 टन से 82% कम है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, उतार-चढ़ाव वाली गोल्ड कीमतें और छुट्टियों का असर हो सकता है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होने से खरीद जारी रहने की उम्मीद है।
क्या सोने के दाम अब गिरेंगे? विशेषज्ञों की राय
कई निवेशक इस गिरावट को देखकर सोच रहे हैं कि सेंट्रल बैंक डिमांड कम होने से गोल्ड प्राइस में भारी गिरावट आएगी। लेकिन ज्यादातर प्रमुख एनालिस्ट्स का अनुमान उल्टा है।
जेपी मॉर्गन का 2026 के अंत तक गोल्ड $6,300 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि लॉन्ग-टर्म में $4,500-$5,000 का लक्ष्य।
गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के लिए $5,400 का टारगेट रखा है, और मासिक 60 टन सेंट्रल बैंक खरीद की उम्मीद जताई।
बर्नस्टीन $4,800 (2026) और $6,100 (2030) का अनुमान लगा रहा है।
वेल्स फार्गो $6,100-$6,300 का टारगेट दे रहा है।
कारण साफ हैं: उभरते बाजारों के सेंट्रल बैंक अभी भी डॉलर से दूर हटकर गोल्ड में डाइवर्सिफाई कर रहे हैं। 95% सेंट्रल बैंक अगले साल रिजर्व में गोल्ड बढ़ाने की उम्मीद जता रहे हैं। साथ ही, ETF में निवेश, ज्वेलरी और बार-कॉइन डिमांड मजबूत बनी हुई है। कुल मिलाकर, 2026 में गोल्ड कीमतों में 5-15% या इससे ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना है।
सेंट्रल बैंक गोल्ड खरीद के प्रमुख ट्रेंड (2020-2025)
चीन: 350 टन से ज्यादा बढ़ोतरी, दुनिया में सबसे बड़ा खरीदार।
पोलैंड: 300 टन+।
तुर्की और भारत: लगातार खरीद।
रूस: पहले बड़ा खरीदार, अब निर्यात पर फोकस।
भारतीय निवेशकों के लिए सलाह
भारत में गोल्ड हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है। सेंट्रल बैंक खरीद में अस्थायी कमी के बावजूद, वैश्विक अनिश्चितता से गोल्ड मजबूत रहेगा। निवेशकों को लॉन्ग-टर्म होल्डिंग पर फोकस करना चाहिए, और किसी भी तेज गिरावट को खरीदारी का मौका मानना चाहिए।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है। निवेश से पहले अपनी रिसर्च और विशेषज्ञ सलाह लें।










