“सरकार स्मार्टफोन सेक्टर के लिए PLI 2.0 लाने पर विचार कर रही है, क्योंकि मौजूदा योजना 31 मार्च को खत्म हो रही है। 2025 में स्मार्टफोन निर्यात $30.13 बिलियन पहुंचा, जिसमें Apple का हिस्सा 76% रहा। नई योजना अप्रैल 2026 से शुरू हो सकती है, जिसमें डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन पर फोकस होगा ताकि चीन के मुकाबले लागत प्रतिस्पर्धा बनी रहे और $30 बिलियन का निर्यात सुरक्षित रहे।”
सरकार स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए PLI स्कीम 2.0 की तैयारी में जुटी है। मौजूदा प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रही है, जिसके बाद निर्यात की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। 2025 में भारत का स्मार्टफोन निर्यात $30.13 बिलियन तक पहुंच गया, जो देश का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर बन गया। इसमें Apple के iPhone का योगदान करीब 76% रहा, यानी लगभग $23 बिलियन। अमेरिका मुख्य बाजार है, जहां भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया।
PLI 2.0 के तहत सरकार इंडस्ट्री से बातचीत कर रही है। नई योजना अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है। मुख्य फोकस डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) पर होगा। फिलहाल लोकल वैल्यू एडिशन करीब 20% है, जो 2020 में 15% से बढ़ा, लेकिन लक्ष्य 35-40% का था। नई स्कीम में इंसेंटिव्स इसी वैल्यू एडिशन से जुड़े होंगे, ताकि कंपोनेंट्स और सब-असेंबली भारत में बनें।
चीन के साथ प्रतिस्पर्धा चुनौती बनी हुई है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट चीन से 11-14% ज्यादा है। हाल में चीन पर कुछ टैरिफ जीरो हो गए, जिससे भारतीय कंपनियों का फायदा कम हुआ। PLI 2.0 में टैरिफ राहत और नए इंसेंटिव्स पर विचार है, ताकि एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धी बने रहें।
PLI स्कीम ने 2021 से अब तक बड़ा बदलाव लाया। मोबाइल फोन प्रोडक्शन ₹2.2 लाख करोड़ से बढ़कर ₹5.45 लाख करोड़ हो गया। एक्सपोर्ट 127 गुना बढ़ा। इलेक्ट्रॉनिक्स कुल एक्सपोर्ट में तीसरा सबसे बड़ा सेक्टर बन गया, जिसमें स्मार्टफोन का योगदान प्रमुख है। Apple, Samsung, Foxconn, Dixon जैसी कंपनियां PLI से फायदा उठा रही हैं। Tata Electronics ने Foxconn की यूनिट्स में हिस्सेदारी बढ़ाई।
PLI 2.0 से लक्ष्य $300 बिलियन इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन तक पहुंचना है। इसके लिए कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर है। बजट 2026-27 में Electronics Component Manufacturing Scheme (ECMS) के लिए ₹40,000 करोड़ का प्रावधान किया गया। India Semiconductor Mission 2.0 भी शुरू हुई। इससे बैटरी, डिस्प्ले, सेमीकंडक्टर जैसे पार्ट्स लोकल होंगे।
मुख्य चुनौतियां और फायदे
चुनौतियां : चीन से लागत अंतर, इंपोर्टेड कंपोनेंट्स (80-82% तक), ग्लोबल सप्लाई चेन रिस्क।
फायदे : China+1 स्ट्रैटेजी से कंपनियां भारत आ रही हैं। US टैरिफ से भारतीय एक्सपोर्ट को बढ़त मिली। रोजगार में 1.33 मिलियन नए जॉब्स, जिसमें 70% महिलाएं।
PLI 2.0 के संभावित फीचर्स
| पैरामीटर | मौजूदा PLI स्कीम | PLI 2.0 (संभावित) |
|---|---|---|
| अवधि | 2021-मार्च 2026 | अप्रैल 2026 से आगे |
| इंसेंटिव बेस | इंक्रीमेंटल प्रोडक्शन/सेल्स | डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) पर फोकस |
| लक्ष्य | असेंबली बढ़ाना | कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना |
| निर्यात प्रभाव | $30.13 बिलियन (2025) | $30 बिलियन+ बचाना और बढ़ाना |
| मुख्य कंपनियां | Apple (76%), Samsung | वही + लोकल प्लेयर्स |
PLI 2.0 से भारत न सिर्फ असेंबली हब बनेगा, बल्कि ग्लोबल वैल्यू चेन में गहराई तक जाएगा। इससे चीन पर निर्भरता कम होगी और निर्यात $30 बिलियन से ज्यादा सुरक्षित रहेगा। इंडस्ट्री के साथ चर्चा जारी है, जल्द फैसला आ सकता है।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री अपडेट्स पर आधारित है।










