“एंजेल वन के शेयर में गुरुवार को करीब 90% की भारी गिरावट दिखी, लेकिन यह कोई क्रैश नहीं बल्कि 1:10 स्टॉक स्प्लिट का तकनीकी समायोजन था। पिछले बंद भाव ₹2,489.90 से आज खुले ₹251 पर, निवेशकों की कुल संपत्ति में कोई बदलाव नहीं आया, जबकि शेयरों की संख्या 10 गुना बढ़ गई। कंपनी का मार्केट कैप स्थिर रहा और यह कदम लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए उठाया गया।”
एंजेल वन शेयर में 90% गिरावट का सच
एंजेल वन लिमिटेड के शेयर आज शेयर बाजार में खुलते ही स्क्रीन पर 90% से ज्यादा की गिरावट दिखाई दी। एनएसई पर स्टॉक पिछले सत्र के बंद भाव ₹2,489.90 से सीधे ₹251.35 पर खुला। कई निवेशकों को लगा कि कंपनी में कोई बड़ी नकारात्मक खबर आई है, लेकिन हकीकत यह है कि यह गिरावट पूरी तरह तकनीकी और प्लान्ड थी।
कंपनी ने जनवरी में Q3 FY26 नतीजे घोषित करते हुए अपना पहला 1:10 स्टॉक स्प्लिट अनाउंस किया था। इसके तहत हर ₹10 फेस वैल्यू वाले एक शेयर को 10 नए शेयरों में बांटा गया, जिनका नया फेस वैल्यू ₹1 हो गया। रिकॉर्ड डेट 26 फरवरी 2026 तय की गई थी, जिसके चलते आज स्टॉक एक्स-स्प्लिट ट्रेडिंग में आया।
स्टॉक स्प्लिट का मतलब होता है कि कंपनी अपनी कुल वैल्यू को ज्यादा शेयरों में बांट देती है, ताकि प्रति शेयर कीमत कम हो जाए और छोटे निवेशकों के लिए खरीदना आसान हो। अगर कोई निवेशक कल तक 1 शेयर रखता था, जिसकी वैल्यू ₹2,489 थी, तो आज उसके पास 10 शेयर हैं, जिनकी कुल वैल्यू अभी भी लगभग वही ₹2,490 के आसपास है (समायोजित प्राइस के आधार पर)। निवेशक की कुल होल्डिंग वैल्यू में कोई नुकसान नहीं हुआ।
आज ट्रेडिंग सेशन में स्टॉक इंट्राडे लो ₹241.40 तक पहुंचा और हाई ₹254.90 रहा। क्लोजिंग के आसपास यह ₹246 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जो स्प्लिट-अडजस्टेड पिछले क्लोज से करीब 2-3% नीचे था। यह मामूली गिरावट मार्केट सेंटिमेंट या ट्रेडिंग वॉल्यूम से जुड़ी हो सकती है, लेकिन कंपनी के फंडामेंटल्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।
स्टॉक स्प्लिट के फायदे क्या हैं?
बेहतर लिक्विडिटी : कम प्राइस पर ज्यादा शेयर ट्रेड होते हैं, जिससे बायिंग-सेलिंग आसान हो जाती है।
रिटेल निवेशकों की पहुंच : ₹2,500 के शेयर छोटे निवेशक आसानी से नहीं खरीद पाते, लेकिन ₹250 के स्तर पर ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं।
ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ना : ऐतिहासिक रूप से स्प्लिट के बाद वॉल्यूम में उछाल आता है, जो स्टॉक को ज्यादा एक्टिव बनाता है।
मार्केट कैप स्थिर : कंपनी का कुल वैल्यूएशन नहीं बदलता, सिर्फ शेयरों की संख्या बढ़ती है।
एंजेल वन ने यह स्प्लिट Q3 रिजल्ट्स के साथ अनाउंस किया था, जहां कंपनी ने कुल इनकम में ग्रोथ दिखाई, हालांकि प्रॉफिट में मामूली गिरावट आई थी। ब्रोकरेज फर्म के लिए यह कदम रिटेल क्लाइंट बेस को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
अगर आप एंजेल वन के शेयरधारक हैं, तो आपकी डीमैट अकाउंट में ऑटोमैटिकली शेयरों की संख्या 10 गुना बढ़ जाएगी। कोई एक्शन लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि, स्प्लिट के बाद प्राइस एडजस्टमेंट के कारण चार्ट में बड़ा गैप दिखेगा, लेकिन यह सिर्फ विजुअल है।
कंपनी का मार्केट कैप अभी भी ₹22,000 करोड़ के आसपास है। हाल के महीनों में ब्रोकरेज सेक्टर पर RBI के कुछ रेगुलेशंस और डेरिवेटिव ट्रेडिंग कर्ब्स का असर पड़ा था, लेकिन स्प्लिट से कंपनी ज्यादा एक्सेसिबल हो गई है।
एंजेल वन शेयर: की प्राइस मूवमेंट (स्प्लिट-अडजस्टेड)
| पैरामीटर | मूल्य (₹) | बदलाव |
|---|---|---|
| पिछला क्लोज (25 फरवरी) | 2,489.90 | – |
| आज ओपन | 251.35 | -90% तकनीकी |
| आज लो | 241.40 | – |
| आज हाई | 254.90 | – |
| करंट ट्रेडिंग रेंज | 246 के आसपास | -2% से -3% |
| मार्केट कैप | ~₹22,000 करोड़ | स्थिर |
यह स्प्लिट कंपनी के लिए पॉजिटिव स्टेप है, जो लॉन्ग टर्म में ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ा सकता है। निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि यह समझना चाहिए कि बाजार में दिखने वाली 90% गिरावट सिर्फ अंकगणितीय समायोजन है।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।










