सरकार ने IRFC में 4% तक की हिस्सेदारी बेचने के लिए OFS शुरू किया है, जिसके चलते शेयर 4.5% से ज्यादा गिरकर 52-सप्ताह के निचले स्तर 104.40 रुपये पर पहुंच गया। फ्लोर प्राइस 104 रुपये तय किया गया है, जिससे सरकार 2% बेस ऑफर से करीब 2,700 करोड़ रुपये जुटा सकती है। संस्थागत निवेशकों से कमजोर मांग के कारण ग्रीन शू ऑप्शन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, और बिक्री सिर्फ 2% तक सीमित रहेगी। यह कदम SEBI के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का पालन करने के लिए उठाया गया है।
IRFC शेयरों में OFS के ऐलान से भारी गिरावट
सरकार ने इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) में अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लॉन्च किया, जिससे कंपनी के शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई। बुधवार को NSE पर IRFC का शेयर 4.58% गिरकर 104.43 रुपये पर बंद हुआ, जबकि दिन में यह 104.40 रुपये के निचले स्तर तक लुढ़क गया। यह स्तर कंपनी के लिए 52-सप्ताह का नया निचला स्तर है। पिछले सत्र में शेयर 109.44 रुपये पर बंद हुआ था।
OFS के तहत सरकार ने बेस ऑफर में 2% हिस्सेदारी यानी 26.13 करोड़ शेयर बेचने का ऐलान किया था, साथ ही ग्रीन शू ऑप्शन के जरिए अतिरिक्त 2% यानी कुल 4% तक बिक्री की गुंजाइश रखी थी। फ्लोर प्राइस 104 रुपये प्रति शेयर तय किया गया, जो पिछले बंद भाव से लगभग 5% की छूट दर्शाता है। पूरे 4% बिक्री पर सरकार को करीब 5,430-5,436 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी।
संस्थागत निवेशकों (QIB) के लिए OFS बुधवार को खुला, लेकिन मांग कमजोर रही। बेस ऑफर के लिए सिर्फ 85-95% सब्सक्रिप्शन हुआ, और ज्यादातर बोली फ्लोर प्राइस के आसपास आई। संस्थागत निवेशकों ने करीब 22.34 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई, जो रिजर्व्ड हिस्से का 94.98% था। कमजोर रिस्पॉन्स के कारण सरकार ने ग्रीन शू ऑप्शन का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया। अब बिक्री सिर्फ बेस 2% तक सीमित रहेगी।
रिटेल निवेशकों के लिए बिडिंग गुरुवार को खुली है। OFS का उद्देश्य SEBI के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों का अनुपालन करना है। दिसंबर 2025 तिमाही के अंत में सरकार की IRFC में 86.36% हिस्सेदारी थी, जो MPS नियमों से काफी ऊपर है। इस बिक्री के बाद हिस्सेदारी घटकर 84.36% रह जाएगी (2% बिक्री पर)।
IRFC रेल मंत्रालय के तहत काम करने वाली NBFC है, जो भारतीय रेलवे के लिए फंड जुटाती है। कंपनी का बिजनेस मॉडल स्थिर है, लेकिन हाल के महीनों में शेयर में गिरावट आई है। पिछले 12 महीनों में शेयर 15% से ज्यादा गिर चुका है, जबकि 52-सप्ताह का उच्च स्तर 148.95 रुपये रहा।
ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी तेजी आई। NSE पर दिन में 56 करोड़ से ज्यादा शेयर ट्रेड हुए, जो औसत से कई गुना ज्यादा है। यह दर्शाता है कि निवेशक OFS से जुड़ी अनिश्चितता पर रिएक्ट कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बिंदु:
फ्लोर प्राइस : 104 रुपये – छूट पर शेयर उपलब्ध, लेकिन बाजार भाव इससे नीचे गिरा।
संभावित राशि : 2% बिक्री से करीब 2,700 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।
प्रभाव : शेयर में प्रेशर जारी रह सकता है, खासकर अगर रिटेल रिस्पॉन्स भी कमजोर रहा।
लॉन्ग-टर्म : IRFC रेलवे से जुड़ी होने से स्थिर इनकम वाली कंपनी है, लेकिन डिस्काउंट पर बिक्री से वैल्यूएशन आकर्षक हो सकता है।
OFS के दौरान शेयरों की आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी होगी, और सफल बोलीदाताओं को फ्लोर प्राइस या उससे ऊपर के भाव पर शेयर मिलेंगे। सरकार इस बिक्री से डिवेस्टमेंट लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में कदम उठा रही है।










