“इंफोसिस ने हाइब्रिड वर्क मॉडल के पर्यावरणीय प्रभाव को मापने के लिए 2.4 लाख से अधिक कर्मचारियों से घरेलू बिजली उपयोग डेटा मांगा है। कंपनी के CFO ने ईमेल के जरिए यह सर्वे शुरू किया, जिसमें बिजली बिल की डिटेल्स शेयर करने को कहा गया। यह कदम कंपनी के सस्टेनेबिलिटी गोल्स से जुड़ा है, लेकिन कर्मचारियों में गोपनीयता की चिंता बढ़ी है।”
इंफोसिस ने हाल ही में अपने कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा, जिसमें Work From Home (WFH) के दौरान घरेलू बिजली उपयोग की जानकारी मांगी गई है। कंपनी का कहना है कि यह डेटा हाइब्रिड वर्किंग के पर्यावरणीय प्रभाव को समझने के लिए जरूरी है। इंफोसिस के CFO जयेश संघवी ने इस सर्वे की शुरुआत की, जो कंपनी के ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी टारगेट्स को हासिल करने का हिस्सा है। सर्वे में कर्मचारियों से पूछा गया है कि वे अपने मासिक बिजली बिल की औसत राशि, WFH दिनों में उपयोग होने वाली बिजली यूनिट्स और घरेलू उपकरणों की लिस्ट शेयर करें।
यह पहल इंफोसिस के 2030 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के प्लान से जुड़ी हुई है। कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में WFH मॉडल ने कुल ऊर्जा खपत में 15% की कमी लाई, लेकिन घरेलू स्तर पर बिजली उपयोग बढ़ा। सर्वे से मिले डेटा का उपयोग कंपनी इंटरनल रिपोर्ट्स में करेगी, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को ट्रैक करने में मदद करेगा। इंफोसिस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी वॉलंटरी है, लेकिन भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि कंपनी के ESG (Environmental, Social, and Governance) स्कोर में सुधार हो।
कर्मचारियों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ ने इसे सकारात्मक कदम बताया, क्योंकि इससे कंपनी रिमोट वर्क के लिए बेहतर सपोर्ट दे सकती है, जैसे बिजली सब्सिडी या एनर्जी एफिशिएंट डिवाइस प्रदान करना। लेकिन कई कर्मचारियों ने डेटा प्राइवेसी पर सवाल उठाए। एक अनाम कर्मचारी ने बताया कि बिजली बिल में घरेलू डिटेल्स शामिल होती हैं, जो व्यक्तिगत जीवन में दखल जैसा लगता है। इंफोसिस ने आश्वासन दिया कि सभी डेटा GDPR और भारतीय डेटा प्रोटेक्शन रूल्स के तहत सुरक्षित रखा जाएगा, और इसे केवल एग्रीगेटेड फॉर्म में इस्तेमाल किया जाएगा।
नारायण मूर्ति, इंफोसिस के फाउंडर, ने हाल के एक इंटरव्यू में सस्टेनेबिलिटी पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि भारतीय आईटी सेक्टर को पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभानी चाहिए, खासकर जब ग्लोबल क्लाइंट्स ग्रीन प्रैक्टिसेस की मांग कर रहे हैं। यह सर्वे उसी दिशा में एक कदम है। इंफोसिस के 2025 फाइनेंशियल रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने पर्यावरण प्रोजेक्ट्स पर 500 करोड़ रुपये निवेश किए, जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी और वेस्ट रिडक्शन शामिल हैं। अब WFH डेटा से कंपनी घरेलू स्तर पर कार्बन फुटप्रिंट कम करने के तरीके तलाश रही है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| सर्वे का उद्देश्य | हाइब्रिड वर्क के पर्यावरणीय प्रभाव को मापना और सस्टेनेबिलिटी गोल्स हासिल करना। |
| मांगी गई जानकारी | मासिक बिजली बिल राशि, WFH में उपयोग यूनिट्स, घरेलू उपकरण लिस्ट। |
| कर्मचारी संख्या | लगभग 2.4 लाख ग्लोबल员工, जिसमें 1.8 लाख भारतीय। |
| कंपनी का निवेश | 2025 में पर्यावरण पर 500 करोड़ रुपये। |
| प्राइवेसी मेजर्स | GDPR अनुपालन, केवल एग्रीगेटेड डेटा उपयोग। |
इंफोसिस की यह पहल भारतीय आईटी इंडस्ट्री में एक ट्रेंड सेट कर सकती है। TCS और Wipro जैसी कंपनियां पहले से ही सिमिलर सर्वे कर रही हैं, लेकिन इंफोसिस ने इसे बड़े स्केल पर लागू किया। 2026 में कंपनी का टारगेट है कि WFH कर्मचारियों के लिए स्पेशल एनर्जी ऑडिट प्रोग्राम लॉन्च करना, जिसमें सोलर पैनल इंस्टॉलेशन पर डिस्काउंट शामिल हो। सर्वे के रिजल्ट्स से पता चला कि औसत WFH कर्मचारी महीने में 200-300 अतिरिक्त यूनिट्स बिजली उपयोग करता है, जो मुख्य रूप से लैपटॉप, इंटरनेट और लाइटिंग से आता है।
कंपनी ने कर्मचारियों को टिप्स भी दिए: एनर्जी-सेविंग मोड में डिवाइस चलाएं, LED लाइट्स यूज करें और अनप्लग्ड रखें। इससे न केवल बिजली बिल कम होगा, बल्कि कंपनी के ओवरऑल कार्बन एमिशन में 10% कमी आएगी। इंफोसिस के HR डिपार्टमेंट ने कहा कि यह सर्वे फीडबैक के आधार पर पॉलिसी चेंज लाएगा, जैसे रिमोट वर्क अलाउंस बढ़ाना।
कर्मचारियों के लिए यह एक अवसर है कि वे कंपनी के ग्रीन इनिशिएटिव्स में योगदान दें। यदि डेटा से पता चलता है कि WFH से पर्यावरणीय लाभ कम है, तो कंपनी रिटर्न टू ऑफिस को और मजबूत कर सकती है। फिलहाल, इंफोसिस का हाइब्रिड मॉडल 60% WFH और 40% ऑफिस पर आधारित है, जो 2025 में महामारी के बाद से चला आ रहा है।
| संभावित प्रभाव | फायदे | चुनौतियां |
|---|---|---|
| पर्यावरण | कार्बन फुटप्रिंट में कमी, रिन्यूएबल एनर्जी प्रमोशन। | घरेलू बिजली उपयोग ट्रैकिंग से अतिरिक्त रिपोर्टिंग। |
| कर्मचारी | संभावित सब्सिडी और टिप्स से बिल सेविंग। | डेटा शेयरिंग से प्राइवेसी रिस्क। |
| कंपनी | ESG स्कोर में सुधार, क्लाइंट आकर्षण। | कर्मचारी असंतोष यदि अनिवार्य बनाया। |
यह सर्वे 31 जनवरी 2026 तक चलेगा, और रिजल्ट्स कंपनी की एनुअल सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट में शामिल होंगे। इंफोसिस ने स्पष्ट किया कि भाग न लेने से कोई पेनल्टी नहीं होगी, लेकिन यह कंपनी के कॉर्पोरेट कल्चर का हिस्सा है। नारायण मूर्ति की विजन के अनुरूप, यह कदम भारतीय आईटी को ग्लोबल लीडर बनाने की दिशा में है, जहां सस्टेनेबिलिटी प्राथमिकता है।
कई कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर अपनी राय शेयर की, जहां कुछ ने इसे इनोवेटिव बताया, जबकि अन्य ने इसे अनावश्यक दखल माना। कंपनी ने फीडबैक चैनल ओपन रखे हैं, ताकि सुधार किए जा सकें। कुल मिलाकर, यह पहल आईटी सेक्टर में WFH और पर्यावरण के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचारों, रिपोर्ट्स और टिप्स पर आधारित है।










