प्रेम वत्स, जिन्हें कनाडा का वॉरेन बफेट कहा जाता है, हैदराबाद में जन्मे एक भारतीय हैं। मात्र 64 रुपये लेकर 1972 में कनाडा पहुंचे, आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग और कनाडा से एमबीए पूरा किया। 1985 में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की स्थापना की, जो आज 37 अरब डॉलर से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनी है। वैल्यू इन्वेस्टिंग, धैर्य और रिस्क मैनेजमेंट से उन्होंने अपनी नेट वर्थ को 2.6 अरब डॉलर (लगभग 22,000 करोड़ रुपये) तक पहुंचाया। उनका साम्राज्य बीमा, रीइंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट में फैला है।
प्रेम वत्स: ₹64 से शुरू हुआ साम्राज्य
प्रेम वत्स का जन्म 5 अगस्त 1950 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की और 1971 में आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। 1972 में बेहद सीमित संसाधनों के साथ कनाडा पहुंचे, जहां उनके पास सिर्फ 8 डॉलर (तत्कालीन विनिमय दर पर लगभग 64 रुपये) थे। शुरुआत में फर्नेस और एयर कंडीशनर बेचकर खर्च चलाया और वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के रिचर्ड आईवी स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए पूरा किया।
एमबीए के बाद उन्होंने कन्फेडरेशन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में काम शुरू किया, जहां इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट की बारीकियां सीखीं। 1980 के दशक में बेंजामिन ग्राहम की वैल्यू इन्वेस्टिंग फिलॉसफी से प्रभावित हुए, जो वॉरेन बफेट की भी गुरु थी। 1984 में अपने पूर्व बॉस टोनी हैमब्लिन के साथ हैमब्लिन वत्सा इन्वेस्टमेंट काउंसिल की स्थापना की।
1985: फेयरफैक्स का जन्म
1985 में प्रेम वत्स ने एक दिवालिया होने की कगार पर खड़ी ट्रकिंग इंश्योरेंस कंपनी मार्केल फाइनेंशियल को अधिग्रहित किया और इसका नाम बदलकर फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स रखा। शुरुआत छोटी थी, लेकिन वैल्यू इन्वेस्टिंग, लंबी अवधि की सोच और सख्त रिस्क मैनेजमेंट से कंपनी को बढ़ाया। फेयरफैक्स ने बीमा और रीइंश्योरेंस पर फोकस किया, साथ ही स्मार्ट इन्वेस्टमेंट से पूंजी बढ़ाई।
कंपनी ने 2008 की वैश्विक वित्तीय संकट में सबप्राइम मार्केट को शॉर्ट करके बड़ा मुनाफा कमाया, जिसने इसकी साख बढ़ाई। आज फेयरफैक्स प्रॉपर्टी-कैजुअल्टी इंश्योरेंस, रीइंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और नॉन-इंश्योरेंस सेगमेंट में काम करती है। इसमें रेस्टोरेंट फ्रैंचाइजी, रिसॉर्ट्स, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट और भारतीय बाजार में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट भी शामिल हैं।
वर्तमान स्थिति और आंकड़े
जनवरी 2026 तक फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स का मार्केट कैप लगभग 37 अरब डॉलर (करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये) है। कंपनी का स्टॉक प्राइस 2,310 CAD के आसपास है, और पिछले 5 सालों में 442% रिटर्न दिया है। प्रेम वत्स की पर्सनल नेट वर्थ फोर्ब्स के अनुसार 2.6 अरब डॉलर (लगभग 22,000 करोड़ रुपये) है, जो मीडिया रिपोर्ट्स में 24,000 करोड़ के करीब बताई जाती है।
माइलस्टोन टेबल
इन्वेस्टमेंट फिलॉसफी
| वर्ष | उपलब्धि |
|---|---|
| 1972 | 64 रुपये लेकर कनाडा पहुंचे |
| 1974 | इंश्योरेंस एनालिस्ट के रूप में करियर शुरू |
| 1985 | फेयरफैक्स फाइनेंशियल की स्थापना |
| 2001 | इन्वेस्टर कॉल्स शुरू, पारदर्शिता बढ़ाई |
| 2008 | सबप्राइम क्राइसिस में शॉर्ट पोजीशन से बड़ा लाभ |
| 2012 | ब्लैकबेरी (RIM) में निवेश, बाद में 4.7 अरब डॉलर में अधिग्रहण |
| 2015 | ऑर्डर ऑफ कनाडा से सम्मानित |
| 2020 | भारत से पद्म श्री प्राप्त |
| 2024 | कैनेडियन बिजनेस हॉल ऑफ फेम में शामिल |
| 2025-26 | बेटे बेंजामिन को उत्तराधिकारी बनाया, कंपनी ग्रोथ जारी |
प्रेम वत्स वैल्यू इन्वेस्टिंग पर जोर देते हैं – कम कीमत पर मजबूत बिजनेस खरीदना, लंबे समय तक होल्ड करना और रिस्क से बचना। वे कभी भी शॉर्ट-टर्म स्पेकुलेशन नहीं करते। फेयरफैक्स ने भारतीय कंपनियों में भी निवेश किया है, जैसे स्टार हेल्थ और अन्य प्राइवेट फर्म्स। उनका मानना है कि धैर्य और ईमानदारी से ही स्थायी संपत्ति बनती है।
उत्तराधिकार और भविष्य
नवंबर 2025 में प्रेम वत्स ने अपने बेटे बेंजामिन वत्स को कंपनी का उत्तराधिकारी घोषित किया। बेंजामिन भी वैल्यू इन्वेस्टिंग में निपुण हैं और भारत के बाजार पर उनकी अलग इन्वेस्टमेंट कंपनी है। यह कदम सुनिश्चित करता है कि फेयरफैक्स की रणनीति अगली पीढ़ी में भी बरकरार रहे।
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